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Sunday, July 15, 2012

बोल बम!

पहन गेरुए वस्त्र, चला जोगी गंगाजी की ओर,
हाथ में थामे कावंड, चाह नहीं अब कुछ और,
मन सुमरे शिव नाम,होए रहा "बोल बम" शोर,
थिरके पग राह पर,जो नाचे मयूर सह घनघोर,
अरे, शिव की ऐसी मन में लौ है उसने जगाई,
भूला सुध बुध, पड़े नीलकंठ की राह दिखाई,
जोर जोर से वो भागे,अपने घर को पीछे छोड़
पहन गेरुए वस्त्र, चला जोगी गंगाजी की ओर,
सावन लाये संग अपने वो कैसी पावन बेला,
शिव बसे मन, चले जोगी पथ पर ना अकेला,
कावंडमय हुआ नगर,चले शिव भक्तों का जोर,
पहन गेरुए वस्त्र, चला जोगी गंगाजी की ओर,
जन देख रहे अचरज में, कैसी शिव की भक्ति,
पग में चाहे पड़े छाले, पर मन में घटे ना शक्ति,
अरे, कैसी दुविधा,चले ना कोई पीड़ा का जोर,
पहन गेरुए वस्त्र, चला जोगी गंगाजी की ओर,
मन में धरे जोगी अपने, केवल एको बिचार,
शिव मेरे त्रिलोकपति, आन करेंगे मेरा उद्धार,
गंगाजल डाल शिवलिंग पर,थमा दूँ मन की डोर,
पहन गेरुए वस्त्र, चला जोगी गंगाजी की ओर,
मन सुमरे शिव नाम,होए रहा "बोल बम" शोर,
थिरके पग राह पर,जो नाचे मयूर सह घनघोर,
==मन वकील