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Friday, May 11, 2012

क्यों मार दिया मुझे बापू?

जब माँ की कोख में मार दिया था मुझे,
तब क्यों नहीं भर आया था दिल, बापू
आज पड़ोस की बिट्टो को डाक्टर,
बनते देख,क्यों फूट फूट रोते हो बापू,
शर्मा जी के आँगन में फैली हुई, वो,
राखी पर खुशियों की सतरंगी चादर,
भाइयों के हाथो पर बंधते पवित्र धागे,
अब क्यों सांप लोट रहा छाती पर, बापू,
जब माँ की कोख में मार दिया था मुझे,
तब क्यों नहीं भर आया था दिल, बापू,
रहमान चाचा को जाते देख,बेटी संग,
अपनी साइकिल पर बैठकर, स्कूल को,
बहुत हसरतों से आँखों में नमी लाते, बापू,
जब माँ की कोख में मार दिया था मुझे,
तब क्यों नहीं भर आया था दिल, बापू,
गुप्ता जी की बेटी की बिधाई के मौके पर,
माँ को थाम कर बहुत रोते रहे,झरने से,
और कहते रहे, अगर आज मैं होती, तो,
जब माँ की कोख में मार दिया था मुझे,
तब क्यों नहीं भर आया था दिल, बापू,
जब भैया ने पकड़ तुम्हारा वो हाथ, ऐसे,
मरोड़ दिया था, तुम्हारे बाप होने का गरूर,
तब आसमान की ओर मुहं करके, बहुत रोये
जब माँ की कोख में मार दिया था मुझे,
तब क्यों नहीं भर आया था दिल, बापू
अब जब तक रहोगे, इस धरती पर,
रहोगे सदा कोसते खुद को, दिन भर
संग में रुलाओगे माँ को भी, मुझे याद कर,
जब माँ की कोख में मार दिया था मुझे,
तब क्यों नहीं भर आया था दिल, बापू
=मन- वकील

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