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Sunday, January 15, 2012

दुनिया बस एक मुसाफिरखाना!

मैं हूँ बस मैं, अरे यहाँ मुझमें कोई और नहीं है,
आज का पल है ये, कोई और बीता दौर नहीं है,
यूँ आसमां से ही टूट कर गिरते है,सितारें यहाँ,
चाँद नहीं, बस यही फलसफा, कुछ और नहीं है,
मत रो कि गर्दिशों में घिरे रहने से आएगी हिम्मत,
बुरे वक्त में, इससे बड़ी उम्मीद कुछ और नहीं है,
मत सोच, कि यहाँ रहना है तुझे ताउम्र बाबस्ता,
दुनिया बस एक मुसाफिरखाना से बढ़कर कुछ और नहीं है ............
---मन-वकील ....

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